इंदौर. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्षों से विचाराधीन प्रकरणों की पेंडेंसी खत्म करने के लिए शनिवार को इंदौर हाई कोर्ट सहित सभी अधीनस्थ न्यायालय में लोक अदालत आयोजित हुई। कुटुम्ब न्यायालय में छोटी-छोटी बातों पर नाराज होकर अलग रह रहे दंपतियों ने जज और वकीलों की समझाइश मान बच्चों के लिए फिर साथ रहने की कसमें खाई। एक दंपती ने एक-दूसरे को चॉकलेट खिलाकर लड़ाई नहीं करने का वादा भी किया।
पलासिया निवासी नारायण यादव और संगीता की 3 दिसंबर 2017 को शादी हुई थी। मामूली विवाद पर संगीता घर छोडक़र चली गई थी। पति ने गुस्से में तलाक का केस लगा दिया, लेकिन वकीलों और जजेस की समझाइश पर दोनों ने साथ रहने का वादा किया। इसी तरह भागीरथपुरा निवासी विनोद चावला और सरला ने दोनों बेटियों के लिए झगड़ा भूल साथ रहने का फैसला किया।
85 वर्षीय ने दूसरी शादी कर पहली पत्नी के बेटों से मांगा भरण पोषण
लोक अदालत में अनूठा मामला आया। जिंसी क्षेत्र निवासी 85 वर्षीय मोहम्मद अली (परिवर्तित नाम) ने कुछ वर्ष पहले दूसरी शादी की। इसके बाद उन्होंने पहली पत्नी से जो पांच बेटे हैं, उनसे भरण पोषण की मांग का केस दायर किया।
कोर्ट ने सभी बेटों को 1-1 हजार रुपए देने के आदेश दिए। इसके बाद पहली पत्नी ने पति से भरण पोषण का केस लगाया। शनिवार को न्यायाधीश सुबोध जैन और रेणुका कंचन की समझाइश पर परिवार से सभी केस वापस लेकर साथ रहने का वादा किया। कुटुम्ब न्यायालय से जुड़े ब्रजेश भार्गव ने बताया अली अब अपनी दोनों पत्नियों के साथ रहेंगे।
34 करोड़ के अवॉर्ड पारित : जिला कोर्ट में लोक अदालत में क्लेम, चेक अनादरण, बिजली कंपनी सहित प्री लिटिगेशन समेत 1905 प्रकरणों में 33 करोड़ 89 लाख 88 हजार रुपए की अवार्ड राशि पारित की गई। जमीन से जुड़े केस में दोनों पक्ष में तीन करोड़ 36 लाख 89 हजार रुपए में समझौता हुआ। एक्सीडेंट क्लेम में बीमा कंपनी और पक्षकार में 50 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति तय हुई। हाई कोर्ट में आोयजित लोक अदालत में विभिन्न प्रकरणों में 67 लाख 38 हजार रुपए की अवॉर्ड राशि पारित हुई। पहली बार उपभोक्ता फोरम में भी लोक अदालत हुई। फोरम कोर्ट नंबर दो में 14 लाख रुपए की अवॉर्ड राशि पारित हुई।
आखिरी मौके का उठाया फायद : छूट के लिए टैक्स जमा कराने वाले उमड़े काउंटर्स पर
वित्त वर्ष के अंतिम दौर में नगर निगम द्वारा बकाया टैक्स में छूट के अंतिम अवसर का फायदा शहर के सैकड़ों लोगों ने उठाया। शनिवार को लोक अदालत के दौरान निगम के काउंटर्स पर लंबी लाइनें लगीं। एक ही दिन में ही निगम को एक करोड़ से ज्यादा की राशि मिली।
निगम द्वारा लोक अदालत के तहत संपत्तिकर और जलकर में सरचार्ज पर छूट दी गई थी। लोक अदालत के दौरान निगम ने सभी काउंटर्स छुट्टी के दिन भी खुले रखने का ऐलान किया था। सुबह 9.30 बजे से निगम के तीन नंबर, दो नंबर सहित अन्य जोनल कार्यालयों पर भीड़ इकट्ठा होना शुरू हो गई थी। कमोबेश ऐसी ही हालत निगम मुख्यालय के काउंटर्स पर भी थी। लोगों से पैसा जमा कराने का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
जनता हुई परेशान
राशि जमा कराने इकट्ठा हुए लोगों के लिए निगम में कोई व्यवस्था नहीं दिखी। जहां लोग पानी के लिए परेशान होते रहे, वहीं राजस्व विभाग के आसपास निगम के वाहन खड़े होने से लोगों को वाहन खड़े करने में भी दिक्कत आई। सिर्फ स्टाफ अंदर जाने दिया।
डीम्ड असेसमेंट में होगा वैट के 7 लाख प्रकरणों का निपटारा
जीएसटी लागू होने से पहले की तिमाही के लंबित प्रकरणों के निपटारे के लिए वाणिज्यिक कर विभाग ने डीम्ड असेसमेंट योजना की घोषणा की है। इसके जरिए करीब सात लाख प्रकरणों का निपटारा किया जाएगा। ये सभी प्रकरण अप्रैल से जून 2017-18 के है। मप्र टैक्स लॉ बार के अध्यक्ष अश्विन लखोटिया ने बताया, ऐसे व्यापारी जिनका उक्त तिमाही का प्रकरण लंबित है वे डीम्ड असेसमेंट में अपना टैक्स निर्धारित कर सकते हैं। व्यापारियों को सिर्फ एक पेज का आवेदन करना होगा। हर साल लंबित प्रकरणों के निपटारे के लिए यह योजना लागू की जाती है। इससे व्यापारियों को मौका मिलने के साथ विभाग को भी राजस्व की आय होती है।
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