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Thursday, December 21, 2023

40 साल में ही ‘पूरे होशो-हवास’ और ‘किसी दबाव के बगैर’...

मुंबई. अमूमन लोग बुजुर्ग होने पर वसीयत लिखवाते हैं, लेकिन भारत में कुछ अमीर युवा 40 साल की उम्र में ही वसीयत लिखवाने लगे हैं। कोरोना काल के बाद यह चलन बढ़ा है। युवा प्रोफेशनल पैसे कमाने के साथ-साथ वसीयत को भी वरीयता दे रहे हैं। देश में ऐसे युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो वसीयत के बारे में वकीलों और वेल्थ मैनेजमेंट कंपनियों से सलाह ले रहे हैं। विशेष रूप से मुंबई, बेंगलूरु, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों से युवा इस बारे में ज्यादा पूछताछ कर रहे हैं।

मुंबई की एक विल राइटिंग फर्म को पिछले छह महीने में करीब 7,000 क्वेरीज मिलीं। इनमें दस में से चार लोगों की उम्र 30 से 50 साल के बीच है। फर्म का कहना है कि कोरोना महामारी और कार्डियक अरेस्ट से मौतों के कारण लोग भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इसलिए अभी से वसीयत की प्लानिंग कर रहे हैं। वेल्थ और सक्सेशन मैनेजर्स बैंकों से साथ मिलकर इस अभियान को बढ़ा रहे हैं।

स्टार्टअप कंपनियों से व्यवस्था हुई आसान

स्टार्टअप कंपनियों ने वसीयत लिखने की व्यवस्था को आसान बना दिया है। इससे भी अमीर और मिडिल क्लास के युवाओं में वसीयत लिखवाने का चलन बढ़ा है। आज घर बैठे वसीयत लिखी जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि 35 से 40 साल की उम्र तक परिवार पूरा हो जाता है। तब तक अमीर युवा मकान और गाड़ी खरीद लेते है। उनकी अच्छी खासी सेविंग भी हो जाती है।

...ताकि आगे न रहे विवाद की गुंजाइश

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि कई युवा कारोबार में अच्छी कमाई कर चुके हैं। वे वसीयत लिखवा रहे हैं, ताकि आगे कोई परेशानी न हो। कुछ युवाओं ने अपने दम पर संपत्ति बनाई है तो कुछ को विरासत में बड़ी संपत्ति मिली है। वे भविष्य में किसी विवाद से बचने के लिए वसीयत लिखवा रहे हैं।



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