इंदौर. महिला दिवस रिसीविंग और गिविंग का संदेश देता है। महिला सशक्तिकरण तभी संभव है, जब एक महिला को अथॉरिटी और पॉवर दी जाती है। क्या भारत में हर महिला सशक्त है? जब महिला पूरी तरह स्वतंत्र, भयमुक्त, अपने कर्तव्य के प्रति पूर्ण रूप से जागरूक और बुद्धिमान हो, तब ही वास्तविक महिला सशक्तिकरण संभव है। ये बात सत्यसाईं की प्रिंसिपल पुनीता नेहरू ने महिला दिवस पर इंदौर मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, महिला के अंदर जन्म देने की शक्ति निहित होती है। अपनी संतान के प्रति कर्तव्य महिला की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। सिर्फ अर्निंग ही महिला को एम्पॉवर नहीं करती है। एक सशक्त महिला वही है, जिसे अपने लक्ष्यों की पूरी तरह से जानकारी प्राप्त हो।
उन्होंने कहा, केवल एक सशक्त समाज में ही महिला सशक्तिकरण संभव है। मैं उस समय का इंतजार कर रही हूं, जब समाज में महिलाओं को समान आंका जाएगा। अगर हम देश में बदलाव देखना चाहते हैं, तो मां को बच्चों को यह संस्कार देने होंगे कि एक महिला का सम्मान कि या जाना चाहिए। महिलाएं घर के काम के लिए और पुरुष बाहर के काम के लिए ये सोच सही नहीं है। हमें आगे आना होगा। कई बार महिलाओं को बोल्ड डिसिजन लेने की जरूरत होती है। एक महिला ही महिला की सबसे बड़ी शत्रु होती है। हमें एक-दूसरे को आगे बढ़ाने के लिए कार्य करना चाहिए और अपने हक के लिए खड़ा होना चाहिए।
मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई एयरपोर्ट डायरेक्टर आर्यमा सान्याल ने कहा, हमें हर परिस्थिति में चेहरे पर मुस्कान बरकरार रखनी चाहिए। जब एक बच्चे का जन्म होता है, तो हम मुस्कान के साथ उसका स्वागत करते हैं। जब कोई जीवन को अलविदा कहे, तब भी हमें एक मुस्कान के साथ विदाई देनी चाहिए। एक महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण होता है मां बनना। जब वह अपने बच्चे को सीने से लगाती है, तब वह खुद को संपूर्ण महसूस करती है। समाज में महिला और पुरुष दोनों बराबर हैं। कोई किसी से कम नहीं है। उन्होंने कहा, न्यूटन के गति के नियमों की तरह हर एक्शन का इक्वल और अपोजिट रिएक्शन होता है। हर विपरीत परिस्थिति में सकारात्म बने रहो।
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