इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय परिसर राजनीति का अखाड़ा बना हुआ था जिसको लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने धरने व प्रदर्शन पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए। उसके खिलाफ अब दोनों छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। विद्यार्थी परिषद के पूर्व नेता हाई कोर्ट में आदेश को चुनौती देने जा रहे हैं।
प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने के बाद से विश्वविद्यालय परिसरों में राजनीति तेज हो गई। एनएसयूआई और कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने आंदोलन व प्रदर्शन तो ठीक कुलपति, अफसर और कर्मचारियों से भी बदसलूकियां कर दीं। इंदौर में तो छात्र नेता प्रदर्शन के दौरान चैनल गेट बंद होने पर पाइप पर चढ़कर कुलपति के कमरे में पहुंच गए।
लगातार हो रहे बवाल के बाद में उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय व कॉलेज परिसर में प्रदर्शन, रैली व राजनीतिक आंदोलनों पर रोक लगा दी। कॉलेज और विवि में छात्र संगठनों के धरने व प्रदर्शन पर रोक के बाद कांग्रेस की एनएसयूआई और भाजपा के जुड़ी अभाविप ने विरोध में मैदान संभाल लिया है।
शैक्षणिक परिसर से सड़क तक आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है। उन्हें पूर्व छात्र नेताओं का भी खुलकर समर्थन मिल रहा है। इसको लेकर विद्यार्थी परिषद के नेता रहे विवेक सिन्हा व आशीष हार्डिया अब हाई कोर्ट में जनहित याचिका लगाने की तैयारी कर रहे हैं। सोमवार को याचिका इंदौर हाईकोर्ट में पेश की जाएगी।
मौलिक अधिकारों का है हनन
सिन्हा व हार्डिया के मुताबिक मध्यप्रदेश शासन की विश्वविद्यालय व महाविद्यालय परिसरों में आंदोलन, प्रदर्शन पर लगाई गई रोक गैर कानूनी है। उसके खिलाफ मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, आयुक्त उच्च शिक्षा समेत संबंधित लोगों को पत्र जारी कर छात्रों के मौलिक अधिकारों के हनन के इस प्रस्ताव को तत्काल रूप से वापस लेने के लिए कहा गया है। प्रस्ताव को वापस नहीं लिया जाता है तो सोमवार को जनहित याचिका लगाई जाएगी। सरकार का ये फैसला लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के खिलाफ है।
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