
भोपाल। हरियाली अमावस्या का पर्व गुरुवार यानि 1अगस्त को मनाया जाएगा। पूरे साल में यह पर्व प्रकृति के संरक्षण और पौधरोपण के लिए खास माना गया है। इस दिन वृक्षों की पूजा कर उनकी रक्षा का संकल्प लिया जाता है।
शहर के पंडितों का कहना है कि इस दिन अधिक से अधिक पौधरोपण करना चाहिए, साथ ही अपने पूर्वजों की याद में पौधरोपण कर उनकी रक्षा का संकल्प लेना चाहिए, इससे पितरों की भी विशेष कृपा मिलती है।
सावन का आधा माह बीत चुका है, और शहर की फिजा हरियाली से आच्छादित हो गई है। हरियाली अमावस्या के साथ ही सावन माह का उत्साह दोगुना हो जाएगा। शहर में राधा कृष्ण मंदिरों में हरियाली अमावस्या से हिंडोला उत्सव की शुरुआत हो जाएगी।
इस दौरान रोजाना अलग-अलग स्वरूपों में श्रीजी का शृंगार और झूला दर्शन होगा। मंदिरों में यह सिलसिला पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन तक चलेगा। महाराष्ट्रीयन समाज का सावन माह भी हरियाली अमावस्या के साथ शुरू होगा। इस दौरान समाज के लोग पूजा अर्चना करेंगे और सावन सोमवार के व्रत रखेंगे।
इस दिन पेड़ काटने या उन्हें नुकसान पहुंचाने से लगता है दोष:
पं. विष्णु राजौरिया के अनुसार हरियाली अमावस्या का पर्व धार्मिक के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। प्राचीन समय से इसी दिन जड़ी बूटियों को संरक्षित और चिन्हित किया जाता है और प्रकृति को हरा भरा रखने के लिए पौधे लगाए जाते हैं।
यह परम्परा ऋषि मुनियों के समय से चली आ रही है। इस दिन पेड़ काटने या उन्हें किसी भी प्रकार से नुकसान पहुंचाने से दोष लगता है। इस दिन अपने पूर्वजों की याद में पौधरोपण करना श्रेष्ठफलदायी होता है, और इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
हर अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण, दान, पुण्य किया जाता है। हरियाली अमावस्या प्रकृति संरक्षण का दिन होता है, इसलिए अपने पूर्वजों की याद में इस दिन पौधरोपण अवश्य करना चाहिए, साथ ही अपने नाम राशि के आधार पर भी पौधरोपण कर उनकी रक्षा करनी चाहिए।
किस राशि के जातक कौन से पौधे लगाएं ...
राशि | पौधे |
मेष |
आम, अकौआ, नीम |
वृषभ | पलाश, पारस पीपल |
मिथुन | अपामार्ग, वट |
कर्क | पलाश, अशोक, वट |
सिंह | खैर, शीशम, मीठा नीम |
कन्या | आंवला, अमरुद |
तुला | जायसम, कटहल, गूलर |
वृश्चिक | करंज, खैर, आंवला |
धनु | पीपल, गूलर |
मकर |
शमी, बांस |
कुंभ | शमी, खेजड़ी |
मीन | पीपल, पलाश |
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